आज का पंचांग — Bengaluru
गुरुवार, 10 सितंबर 2026 · कृष्ण पक्ष, अमावस्या · Bhadrapada मास · वर्षा ऋतु
सूर्योदय
6:08 am
सूर्यास्त
6:24 pm
चंद्रोदय
—
चंद्रास्त
5:51 pm
आज का पंचांग क्या है?
गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को Bengaluru में तिथि कृष्ण पक्ष अमावस्या है, जो 11 सित॰, 3:25 am तक रहेगी; चंद्रमा पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में है। योग सिद्ध और करण चतुष्पाद है। सूर्योदय 6:08 am और सूर्यास्त 6:24 pm पर है। राहु काल 1:48 pm से 3:20 pm तक रहता है, और अभिजित मुहूर्त — दिन का सबसे शुभ समय — 11:52 am से 12:41 pm तक।
शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
11:52 am – 12:41 pm
दिन का आठवाँ मुहूर्त, जो मध्याह्न पर पड़ता है। परंपरा से लगभग हर कार्य के आरंभ के लिए शुभ माना जाता है।
ब्रह्म मुहूर्त
4:32 am – 5:20 am
प्रातःकाल से पूर्व का अंतिम प्रहर, जप, ध्यान और अध्ययन के लिए रखा गया।
अशुभ काल
राहु काल
1:48 pm – 3:20 pm
राहु के अधीन समय। नए कार्य, यात्रा और खरीदारी परंपरा से इसके बाद के लिए टाल दी जाती है।
यमगंड
6:08 am – 7:40 am
यम से संबंधित काल। शुभ आरंभ के लिए इससे बचा जाता है।
गुलिक काल
9:12 am – 10:44 am
शनि पुत्र गुलिक का भाग। कहा जाता है कि इस समय आरंभ किया कार्य स्वयं को दोहराता है।
पंचांग के पाँच अंग
तिथिकृष्ण अमावस्या
10 सित॰, 5:03 am → 11 सित॰, 3:25 am
नक्षत्रपूर्वा फाल्गुनी
10 सित॰, 8:34 am → 11 सित॰, 7:46 am
योगसिद्ध
09 सित॰, 4:21 pm → 10 सित॰, 1:46 pm
करणचतुष्पाद
10 सित॰, 5:03 am → 10 सित॰, 4:11 pm
वारThursday
चंद्रमा सिंह राशि में · Bhadrapada मास
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पंचांग क्या है?
पंचांग किसी दिन का हिंदू कालदर्शक है, जो पाँच अंगों से बनता है: तिथि (चंद्र दिवस), वार, नक्षत्र (चंद्रमा का नक्षत्र), योग और करण। ये मिलकर तय करते हैं कि दिन का कौन-सा भाग अनुष्ठान, यात्रा या नए कार्य के लिए शुभ माना जाएगा।
राहु काल क्या है और क्या इससे बचना चाहिए?
राहु काल दिन के प्रकाश-काल का आठवाँ भाग है, जो प्रत्येक वार को अलग स्थान पर पड़ता है। नए कार्य, यात्रा, खरीदारी और अनुबंध पर हस्ताक्षर परंपरा से इसके बाद किए जाते हैं। पहले से चल रही पूजा रोकी नहीं जाती, और राहु के निवारण के उपाय कभी-कभी जानबूझकर इसी काल में किए जाते हैं।
पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?
हर मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला जाता है। कोलकाता में सूर्योदय दिल्ली से लगभग चालीस मिनट पहले और पश्चिमी गुजरात से एक घंटे से भी पहले होता है, इसलिए राहु काल, अभिजित और ब्रह्म मुहूर्त सभी उसी के साथ खिसकते हैं। तिथि, नक्षत्र और योग खगोलीय हैं और हर जगह एक ही क्षण बदलते हैं, पर उस क्षण का घड़ी-समय आपके समय क्षेत्र पर निर्भर करता है।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
अभिजित दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है, जो मध्याह्न पर पड़ता है। इसे व्यापक रूप से शुभ माना जाता है और प्रायः तब चुना जाता है जब कोई अन्य अनुकूल समय उपलब्ध न हो। बुधवार को और दक्षिण दिशा की यात्रा के लिए परंपरा से इससे बचा जाता है।
यह पंचांग कैसे गणना किया जाता है?
तिथि, नक्षत्र, योग और करण उस दिन सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से गणना किए जाते हैं, तथा सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त आपके शहर के अक्षांश और देशांतर से। राहु काल, यमगंड और गुलिक दिन के प्रकाश-काल को आठ भागों में बाँटकर उस वार के लिए नियत भाग लेते हैं।
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